एक अध्ययन का निष्कर्ष

नई दिल्ली. दुनिया की महाशक्ति अमेरिका दुनिया में एकमात्र ऐसा देश है जिसका हरेक नागरिक सालाना 1300 प्लास्टिक के बैग समंदर, सड़कों और ऐसी दूसरी जगहों पर डाल रहा है।

प्लास्टिक कचरे पर एक स्टडी में सामने आया है कि अमेरिका में 4.63 करोड़ टन प्लास्टिक का कचरा पैदा किया गया। जिसे ना तो जलाया गया, ना लैंडफिल में डाला गया और ना ही रिसाइकिल किया गया। अमेरिका में पैदा हुए प्लास्टिक में से 12-25 लाख टन प्लास्टिक कचरे के रूप में जमीन, नदियों, झीलों और सागरों में डाल दिया गया। वैसे भी अमेरिका को समंदर में प्लास्टिक उड़ेलने वाले 10 सबसे खराब देशों में रखा गया है। अमेरिका तीसरी दुनिया के सबसे ज्यादा प्लास्टिक कचरे वाले देशों में शामिल है। आकलन है कि करीब 16 लाख टन प्लास्टिक अमेरिका ने समंदर में डाला है।

चीन और दूसरे देशों ने अमेरिकी कचरे का आयात बंद कर दिया है। 2016 में अमेरिका से प्लास्टिक का निर्यात चरम पर था। अब उसमें 70 फीसदी की गिरावट आई है। अगले साल की शुरुआत से कई और देश अमेरिकी कचरे को स्वीकार नहीं करेंगे क्योंकि इसके लिए एक अंतरराष्ट्रीय सहमति बनी है।

हालांकि अमेरिकी उद्योग जगत स्थिति को सुधारने के लिए अरबों डॉलर खर्च कर रहा है। इसमें रिसाइक्लिंग की नई तकनीक के अलावा नए बिजनेस मॉडल भी बनाए जा रहे हैं ताकि कचरे को घटाया जाए। इसमें रिसाइकिल किए जाने वाले मेटेरियल का पैकेजिंग में इस्तेमाल बढ़ाना भी शामिल है।

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