कार्बन उत्सर्जन पर क्लाइमेट ट्रांसपेरेंसी की रिपोर्ट

नई दिल्ली. पेरिस समझौते अलग हो चुके अमेरिका में ग्रीन हाउस गैसों का उत्सर्जन जी20 देशों के औसत से दोगुना है। अमेरिका का यातायात उत्सर्जन जी20 देशों के औसत से चार गुना है। इसमें 2016-18 से 3.6 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। इस लिहाज से देखें तो कार्बन उत्सर्जन मामले में भारत को आराम से बेचारा कहा जा सकता है, जिसका उत्सर्जन लगभग थमने के कगार पर आ गया है।

जी हां, भारत के बारे में अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं की लगातार नकारात्मक रिपोर्टों के बीच जलवायु परिवर्तन पर भारत की तारीफयुक्त रिपोर्ट आई है। रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत सौर ऊर्जा से बिजली उत्पादन बढ़ाने पर जोर देकर जलवायु को सुरक्षित बनाने की दिशा में अन्य ​देशों के मुकाबले द्रुत गति से आगे बढ़ रहा है।

जलवायु परिवर्तन नजर रखने वाली संस्था क्लाइमेट ट्रांसपेरेंसी की ताजा रिपोर्ट में कहा गया है​ कि भारत लक्ष्यों को तेजी से पूरा कर रहा है। जी20 देशों में भारत इकलौता ऐसा देश है जो जलवायु परिवर्तन असर पर वचनबद्धताओं को पूरा कर रहा है। क्लाइमेट ट्रांसपेरेंसी दुनिया भर के 14 रिसर्च और गैर सरकारी संगठनों की साझेदारी वाला मंच है।

बदमाशी कर रहा है यूरोपीय संघ

रिपोर्ट के अनुसार 2015 में हुए पेरिस जलवायु समझौते के तहत भारत ने वादा किया था कि 2030 तक अपने कार्बन उत्सर्जन में 33 से 35 प्रतिशत की कमी लाएगा और इसके लिए ऊर्जा, कचरा, उद्योग, यातायात और वन से जुड़े क्षेत्रों में कदम उठाए जा रहे हैं। ये कदम इस सदी के आखिर तक पृथ्वी के तापमान में वृद्धि को दो डिग्री सेल्सियस तक सीमित कर देंगे। जी20 में शामिल अन्य देश और यूरोपीय संघ ऐसे कदम नहीं उठा रहे हैं जिनसे ग्लोबल वॉर्मिंग को 1.5 से 2 डिग्री के बीच सीमित किया जा सके। अनुमान है कि वर्ष 2100 तक तापमान में 2.7 डिग्री तक वृद्धि हो सकती है।
रिपोर्ट में कार्बन डाई ऑक्साइड के वैश्विक उत्सर्जन को रोकने की अपील भी की गई है। रिपोर्ट में कहा गया है कि यूरोपीय संघ का कार्बन उत्सर्जन पिछले एक दशक में घटा है, लेकिन 2030 तक उत्सर्जन में 40 प्रतिशत कटौती के लक्ष्य को पूरा करने की दृष्टि से वह अपर्याप्त है।

प्राकृतिक गैस उपयोग पर भी उठाए सवाल

पोलैंड, चेक गणराज्य बुल्गारिया और रोमानिया से कोयले का इस्तेमाल कम करने के लिए कहा गया है। यूरोपीय संघ में प्राकृतिक गैस के इस्तेमाल पर भी सवाल उठाए गए हैं। यूरोपीय संघ प्राकृतिक गैस से जुड़ी 23 इंफ्रास्ट्रक्चर परियोजनाओं में निवेश कर रहा है। उधर चीन में ग्रीन हाउस गैसों का उत्सर्जन लगातार जी20 देशों के औसत उत्सर्जन से ज्यादा बना हुआ है और 2030 तक इसके चरम पर पहुंचने की उम्मीद है।

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