नई दिल्ली. वैश्विक नेतृत्व के लिए चीन के बढ़ते कदमों ने अमेरिका को हिला कर रख दिया है। उसके विदेश मंत्रालय की 70 पन्नों की एक रिपोर्ट में स्वीकार किया गया है कि चीन अमेरिका को वैश्विक नेता पद से विस्थापित करने की फिराक में है। रिपोर्ट में भारत को प्रतिरोधक शक्ति के रूप में मान्यता देते हुए उसे परोक्ष रूप से अग्रिम मोर्चे पर डटे रहने को कहा गया है। अमेरिका ने कहा है कि चीन भारत को असली प्रतिद्वंद्वी मानता है।

शीतयुद्ध की फिर शुरूआत के संकेत

रिपोर्ट में दबे-ढके शब्दों में कहा गया है कि इससे फिर शीतयुद्ध जैसे हालात है। महान शक्तियों की प्रतियोगिता के नए युग की शुरूआत बताते हुए अमेरिकी रिपोर्ट में स्पष्ट किया गया है कि भारत के बढ़ते प्रभाव के चलते चीन उसे एक प्रतिद्वंद्वी मानता है और अमेरिका व उसके सहयोगियों तथा अन्य लोकतांत्रिक देशों के साथ उसकी रणनीतिक साझेदारी को बाधित करना चाहता है। इस कवायद का अंतिम उद्देश्य विश्व महाशक्ति के रूप में अमेरिका को विस्थापित करना है।

नई दिल्ली की रणनीति​क साझेदारियों को भंग करने की मंशा

अमेरिका के नए राष्ट्रपति चुने गए जो बाइडन को सत्ता हस्तांतरण होने से पहले आए खास नीति दस्तावेज में कहा गया है कि चीन क्षेत्र के कई देशों की सुरक्षा, स्वायत्तता और आर्थिक हितों को कमजोर कर रहा है। चीन भारत को एक प्रतिद्वंद्वी के तौर पर देखता है। अमेरिका, जापान, ऑस्ट्रेलिया के साथ नई दिल्ली की रणनीतिक साझेदारी और अन्य लोकतंत्रों के साथ उसके संबंधों को बाधित करना चाहता है। उसे आर्थिक रूप से फंसा कर बीजिंग की महत्वाकांक्षाओं को समायोजित करने के लिए उसे बाध्य करने का प्रयास कर रहा है।

आसियान राष्ट्रों को भी खतरा

चीन इस क्षेत्र में कई अन्य देशों की सुरक्षा, स्वायत्तता और आर्थिक हितों को कमजोर कर रहा है। इनमें दक्षिण पूर्व एशियाई देशों के संगठन आसियान के सदस्यों के साथ ही महत्वपूर्ण मेकोंग क्षेत्र और प्रशांत द्वीप समूह के राष्ट्र शामिल हैं। अमेरिकी विदेश मंत्रालय की 70 पन्नों की रिपोर्ट में कहा गया कि अमेरिका और दुनिया भर के देशों में जागरूकता बढ़ रही है, सत्तारूढ़ चीन की कम्युनिस्ट पार्टी ने महान शक्तियों की प्रतियोगिता के नए युग की शुरूआत कर दी है।

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