जर्मन प्रयोगशाला की जांच से हुआ भंडाफोड

नई दिल्ली. शहद बनाने वाली भारतीय कम्पनियों की एक साजिश का भंडाफोड हुआ है। ये कम्पनियां एक ओर शहद में शुगर सीरप मिलाकर मधुमक्खी पालकों की कमर तोड़ रही हैं तो दूसरी ओर इम्युनिटी बढ़ाने के लिए शहद पी रहे लोगों को बीमारियों के रास्ते पर धकेल रही हैं।

जांच मानकों को देते हैं गच्चा

सेंटर फार साइंस एंड एनवॉयरमेंट (सीएसई) की महानिदेशक सुनीता नारायण ने विदेशी प्रयोगशालाओं में भारतीय ब्रांडों के शहद के नमूनों की जांच परिणामों के आधार पर यह दावा किया है। भारत की कम्पनियों के नमूनों में चीन में बनी ‘शुगर सीरप पाई गई है’। चीनी शुगर सीरप भारत में तय किए गए शहद के मानकों पर खरा उतरता है। शहद में चीनी शुगर सीरप की मिलावट का पता जर्मनी की प्रयोगशाला में कराई गई जांच से चला। शहद नमूनों की न्यूक्लियर मैग्नेटिक रेजोनेंस स्पेक्ट्रोस्कोपी (एनएमआर) जांच में 13 में से 3 ब्रांड पास हुए। सीएसई का कहना है कि चीन की कंपनियां ऐसे शुगर सीरप बना रही हैं जो भारत के जांच मानकों को गच्चा देने में सक्षम हैं।

पतंजलि, झंडु, डाबर भी फेल

सीएसई का कहना है कि 13 ब्रांड में से सफोला, मार्कफेड सोहना और नेचर्स नेक्टर ही सभी परीक्षणों में पास हुए। शहद के प्रमुख ब्रांड जैसे डाबर, पतंजलि, बैद्यनाथ, झंडु, हितकारी और एपिस हिमालय एनएमआर टेस्ट में फेल हो गए। सीएसई के अनुसार भारतीय बाजार के 13 ब्रांडों के शहद नमूनों को जांच के लिए पहले गुजरात के राष्ट्रीय डेयरी विकास बोर्ड (एनडीडीबी) में स्थित सेंटर फॉर एनालिसिस एंड लर्निंग इन लाइवस्टॉक एंड फूड (सीएएलएफ) में भेजा। उसके बाद इन्हीं ब्रांड के नमूनों को न्यूक्लियर मैग्नेटिक रेजोनेंस (एनएमआर) परीक्षण पर परखा गया तो लगभग सभी नमूने फेल हो गए। एनएमआर परीक्षण मोडिफाई शुगर सिरप को जांचने के लिए किया जाता है। 13 ब्रांड परीक्षणों में सिर्फ 3 ही एनएमआर परीक्षण में पास हो पाए।

मिलाते हैं राइस सीरप

सीएसई का आरोप है कि सरकार को शहद में हो रही मिलावट का अंदेशा होने की वजह से ही निर्यात किए जानेवाले शहद का एनएमआर परीक्षण 1 अगस्त, 2020 से अनिवार्य कर दिया गया। उसका कहना है कि भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (एफएसएसएआई) ने आयातकों और राज्य के खाद्य आयुक्तों को बताया था कि देश में आयात किए जा रहे गोल्डन सीरप, इनवर्ट शुगर सीरप और राइस सीरप का इस्तेमाल शहद में मिलावट के लिए किया जा रहा है।

उगला हुआ पराग होता है शहद

शहद के एक चम्मच में शुगर से थोड़ी अधिक कैलोरी होती है। शुगर कार्बोहाइड्रेट की भरमार वाला शहद मधुमक्खियों द्वारा मकरंद इकट्ठा करने और छत्ते में उसे बनाने के अद्भुत तरीके के कारण अत्यंत गुणकारी होता है। मधुमक्खियां पराग का सेवन करके उसे पचाकर उगलती हैं। इससे शहद की शुगर एंजाइम, अमीनो एसिड, फेनोलिक यौगिक जैसे फ्लेवोनोइड, खनिज और अन्य फाइटोकेमिकल्स में बदल जाती है। इससे शहद एंटीऑक्सीडेंट, रोगाणुरोधी, सूजन-जलन में राहत पहुंचाने वाले गुणों से युक्त हो जाता है। शहद इम्यून सिस्टम के लिए अच्छा होता है।

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