नई दिल्ली. आसमान छू रहे सोने को खरीदकर प्रसन्न होने वालों के लिए बुरी खबर, वे जिस सोने को खरीद रहे हैं, उसका तीस प्रतिशत रीसाइकिल सोना है जिसे पुराना सोना गलाकर बनाया जाता है। सोना रीसाइकिल करने की प्रक्रिया में भारी मात्रा में कार्बन डाइआक्साइड निकलती है। पिछले 20 वर्षों में सोने की जितनी आपूर्ति हुई है, उसका 30 फ़ीसद हिस्सा रिसाइकिलिंग से ही आता है।

जर्मन गोल्ड रिफ़ाइनरी की एक रिसर्च के अनुसार एक किलो सोना रीसाइकल करने में 53 किलो या उसके आसपास कार्बन डाईऑक्साइड निकलती है। जबकि खदान से इतना ही सोना निकालने में 16 टन या उसके बराबर कार्बन डाईऑक्साइड निकलती है। सोने का खनन भी कम जहरीला नहीं है। इसी वजह से सोने की खदानों वाले इलाकों में रहने वाले सोने की खदानों के खिलाफ रहते हैं। चिली में पास्कुआ-लामा खदान में खनन का काम इसलिए रोक दिया गया कि वहां के पर्यावरण संरक्षक कार्यकर्ता विरोध करने लगे थे। उत्तरी आयरलैंड के देश टाइरोन में लोग सड़कों पर उतर आए।

एक सच ये भी है कि जहां सोने की खदानें हैं, वहां के लोगों की ज़िंदगी बदल गई है। अमेरिका के नेवाडा सूबे की गोल्ड माइन दुनिया की सबसे बड़ी सोने की खदान है। यहां से हर साल लगभग 100 टन से ज़्यादा सोना निकाला जाता है। इस इलाक़े के आसपास के लोगों को न सिर्फ़ इन खदानों की वजह से नौकरी मिली है, बल्कि उनका रहन सहन भी बेहतर हुआ है। सोने की खदान से सिर्फ़ सोना ही नहीं निकलता, बल्कि इसके साथ अन्य क़ीमती धातुएं जैसे तांबा और सीसा भी निकलते हैं।

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