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आल इंडिया यूनानी तिब्बी कांग्रेस का आरोप: केन्द्र सरकार ने यूनानी पैथी को चौथे स्थान पर धकेला

प्रतीकात्मक फोटो

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आल इंडिया यूनानी तिब्बी कांग्रेस का आरोप है कि केन्द्र सरकार ने नेशनल कमीशन फॉर इंडियन सिस्टम आफ मेडिसिन एक्ट 2020 बनाकर यूनानी पैथी को चौथे स्थान पर धकेल दिया है जबकि पूर्व में आयुर्वेद और यूनानी पैथी को बराबर का दर्जा प्राप्त था। तिब्बी कांग्रेस सरकार की इस नकारात्मक नीति को बदलवाने के लिए सांसदों से सम्पर्क कर इस मामले को संसद में उठवाएगी।

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ये आरोप आल इंडिया यूनानी तिब्बी कांग्रेस की वेबिनार में प्रोफेशर मुश्ताक अहमद ने लगाए। वेबिनार की अध्यक्षता करते हुए प्रोफेसर मुश्ताक अहमद ने कहा कि पूर्व में सेन्ट्रल काउंसिल आफ इंडियन मेडिसिन के तहत आयुर्वेद और यूनानी को बराबरी का दर्जा मिला हुआ था लेकिन अब सरकार ने नेशनल कमीशन फॉर इंडियन सिस्टम आफ मेडिसिन एक्ट 2020 के तहत 21 सदस्यों को नामित करके पूरी यूनानी पैथी को चौथे स्थान पर धकेल दिया है।

प्रोफेसर मुश्ताक अहमद ने कहा कि यूनानी को आयुर्वेद के साथ-साथ विकसित करने के लिए 1916 में हकीम अजमल खां ने दिल्ली में तिब्बिया कॉलेज की स्थापना करके एक ही छत के नीचे आयुर्वेद और यूनानी शिक्षा की व्यवस्था की थी। लेकिन पिछले चार साल से नित नए अध्यादेश जारी करके यूनानी को नुकसान पहुंचाया जा रहा है।

वेबिनार में हकीम एसपी भटनागर, डा. एसएम हुसैन, डा. आर सिंह, डा. सत्या, डा. विष्णु गोपाल आदि ने हिस्सा लिया। वेबिनार का संचालन आल इंडिया यूनानी तिब्बी कांग्रेस के राष्ट्रीय सचिव डा. एस एम याकूब ने किया।

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