PAN Card: केंद्र सरकार नेशनल सिंगल विंडो सिस्टम में सिंगल एंट्री के लिए परमानेंट अकाउंट नंबर यानी पैन (PAN) कार्ड को आल परपज आईडी के तौर पर मान्यता देने पर विचार कर रही है. इससे व्यापार से जुड़े लोगों के अलावा सामान्य नागरिकों को अलग-अलग पोर्टल पर अलग-अलग आईडी बनाने के झंझट से निजात मिल जाएगी. फिलहाल सिंगल विंडो सिस्टम के जरिए क्लियरेंस पाने के लिए EPFO, ESIC, GSTN, TIN, TAN और PAN समेत एक दर्जन से ज्यादा आईडी देने होते हैं.

नेशनल सिंगल विंडो सिस्टम समीक्षा में सामने आया कि मौजूदा डेटाबेस में से सिंगल एंट्री प्वाइंट यानी किसी एक डेटाबेस के इस्तेमाल की इजाजत दी जाए. ये डेटाबेस पहले से ही सरकार के पास है.डेटाबेस में परमानेंस एकाउंट नंबर यानी पैन कार्ड या पैन नंबर (PAN) को सिंगल एंट्री आईडी के रूप में मान्यता देने का संकेत सरकार के सूत्रों ने दिया है. बता दें कि कंपनी और उसकी पूरी बुनियादी जानकारी का डेटा, पता, डायरेक्टर्स समेत उससे जुड़े बहुत सारे सामान्य और जरूरी डेटा पैन नंबर के डेटाबेस में उपलब्ध होते हैं. वाणिज्य और उद्योग मंत्रालय इस सिलसिले में वित्त मंत्रालय के राजस्व विभाग से पूर्व में चर्चा कर चुका है.

क्यों जरूरी है सिंगल विंडो

उद्योग और आंतरिक व्यापार को बढ़ावा देने के लिए विभाग द्वारा विकसित की जा रही नेशनल सिंगल विंडो सिस्टम यानी एनएसडब्ल्यूएस (NSWS) का मकसद निवेशकों के लिए विभिन्न स्वीकृतियों के लिए आवेदन करने और इकाइयों को स्थापित करना आसान बनाने के लिए “वन-स्टॉप शॉप” बनना है. एनएसडब्ल्यूएस के जरिए सरकार अपने विभागों से तमाम तरह के क्लीयरेंस की पहचान करने, प्राप्त करने और समय समय पर जायजा लेने के लिए डिजिटल सिंगल विंडो मुहैया कराना चाहती है. सरकार चाहती है कि निवेशकों को परमिट हासिल करने के लिए एक विभाग से दूसरे विभाग का चक्कर न लगाना पड़े. सिंगल विंडो से डिजीटल समेत कई प्लेटफार्मों पर जरूरी डेटाबेस जमा करने की परेशानी से फ्री करना चाहती है.

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