मूनलाइटिंग ने भारत की आईटी कंपनियों की नींव हिला दी है. संभवत: ऐसा पहली बार हुआ कि मूनलाइट के आरोप में एक साथ 300 कर्मचारी निकाल दिए गए हैं. विप्रो के इस कदम से अन्‍य आईटी कंपनियां भी चौकन्‍नी हो गई हैं. विप्रो की प्रतिद्वंद्वी इंफोसिस ने तो कर्मचारियों को बर्खास्‍तगी का ईमेल भेज दिया है. मूनलाइटिंग की इस बड़ी घटना से उद्योग जगत में भारी हलचल हैं, विशेषकर आईटी सेक्‍टर की कंपनियां बहुत सतर्क हो गई हैं.

पता चला है कि इन कंपनियों ने अपने एचआर को मूनलाइटिंग में लिप्‍त कर्मचारियों का पता लगाने का आदेश दिया है. माना जा रहा है कि एक साथ 300 मूनलाइट कर्मचारी पकड़े जाने के बाद कंपनियां अपने कर्मचारियों के कंप्‍यूटर सिस्‍टम्स की सर्विलांस बढ़ाने में जुट गई हैं.

ये भी कहा जा रहा है कि दिग्‍गज आईटी कंपनियों ने विप्रो से बर्खास्‍त मूनलाइट कर्मचारियों की सूची सार्वजिनक करने की मांग की है. ताकि वे मूनलाइटिंग के आरोप में बर्खास्‍त उन कर्मचारियों को पहचान सकें जो अभी भी उनकी कंपनी में काम कर रहे हैं.

विप्रो प्रमुख अजीम प्रेमजी ने भी इसे अनैतिक धोखाधडी करार दिया है. विप्रो प्रमुख की इस टिप्पणी ने उद्योग जगत में हलचल मचा दी है. टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज के मुख्य परिचालन अधिकारी (सीएफओ) एनजी सुब्रमण्यम ने इसे एक नैतिक मुद्दा करार दिया है, जबकि टेक महिंद्रा के सीईओ सीपी गुरनानी ने कहा कि ये धोखाधड़ी है.

मूनलाइट शब्द का प्रयोग उन श्रमिकों के लिए किया जाता है जिन्होंने गुप्त रूप से दूसरी नौकरी ली है. यानी अपनी कंपनी को बताए बिना दूसरी कर लेने वालों को मूनलाइट कर्मचारी कहा जाता है. प्रेमजी ने कहा कि वह दूसरी नौकरी करने वाले कर्मचारियों के खिलाफ नहीं है, लेकिन उन्‍हें पारदर्शिता रखनी चाहिए.

विप्रो प्रमुख ऋषद प्रेमजी ने प्रतिस्पर्धियों के लिए गुप्त रूप से काम करने के लिए 300 कर्मचारियों को निकाल देने के बाद कहा है कि मूनलाइन कर्मचारी होना यानी अपने नियोक्‍ता को धोखा देना है. एक अखिल भारतीय प्रबंधन संघ कार्यक्रम में प्रेमजी ने कहा, मूनलाइट कर्मचारी होना बहुत बुरी बात है. ऐसे कर्मचारी ना तो कंपनियों को पसंद आते हैं और ना ही कोई कंपनी उन्‍हें बर्दाश्‍त करना चाहेगी. उन्‍होंने कहा कि वे पारदर्शिता को सबसे अधिक महत्‍व देते हैं. मूनलाइट बन जाने का किसी कर्मचारी को हक नहीं है.

उन्होंने विप्रो की घटना का जिक्र करते हुए दोहराया कि प्रतिद्वंद्वी फर्मों के लिए काम कर रहे मौजूदा कर्मचारी का पता चल जाने के बाद उनकी नौकरी को बरकरार रख पाना संभव नहीं है. ये सीधेसीधे नियोक्‍ता को नुकसान पहुंचाने का प्रयास है.

इधर इंफोसिस ने भी कंपनी को बताए बिना दूसरी नौकरी करने वाले कर्मचारियों को चेतावनी दी है कि वे सावधान रहें. कंपनी के एचआर डिपार्टमेंट ने कर्मचारियों को भेजे गए हालिया ईमेल में कहा है कि इंफोसिस कर्मचारियों को दूसरी नौकरी करने से पहले अपने अनुबंध को पढ़ लेना चाहिए. कंपनी ने कर्मचारियों को काम के घंटों के दौरान या बाद में दूसरी नौकरी करने पर बर्खास्तगी की चेतावनी दी है.

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