क्या आप जानते हैं कि भारत के कार बाजार में एक ऐसी जंग चल रही है जिसमें तीसरे नम्बर का खिलाड़ी पहले और दूसरे स्थान पर काबिज सबसे बड़ी कार कम्पनियों को निगल जाने की कोशिश कर रहा है। फिलहाल भारत के कार बाजार पर मारूति की बादशाहत है। हुंडई दूसरे नम्बर की खिलाड़ी है लेकिन उसकी कुल बिक्री मारूति से आधी भी नहीं है। जबकि तीसरे नम्बर की टाटा की बिक्री हुंडई के लगभग बराबर है। कार बाजार एक्सपर्ट टाटा की नेक्सॉन और पंच इन युवा पीढ़ी के बीच लोकप्रिय होती जा रही है।

जबकि इस मामले में मारूति और हुंडई के पास टाटा के मॉडलों जैसे मॉडल नहीं है। इन दोनों कंपनियों की कारें या तो लोअर मिडिल क्लास की पसंद हैं या फिर चालीस वर्ष से अधिक उम्र वालें उनकी गाडियां पसंद करते हैं। बीस से चालीस तक के आयुवर्ग में टाटा की नेक्सॉन और पंच खूब पसंद की जा रही है। इसलिए एक्सपर्ट मान रहे हैं कि मारूति की बादशाहत खत्म करने में टाटा को भले ही कई दशक लग जाएं लेकिन हुंडई उसके सीधे निशाने पर है। टाटा जल्द ही कार बाजार का दूसरे नम्बर का मुकुट हासिल कर सकती है।

आंकड़ों की नजर में कार बाजार

मारुति सुजुकी नवंबर 2022 के लिए कार बाजार में हिस्सेदारी की सूची में 41.30% की हिस्सेदारी के साथ नवंबर 2021 में 44.81% से नीचे थी।

नवंबर 2022 में कार बिक्री में मारुति सुजुकी 50% से अधिक शेयर के साथ दनदना रही थी। इंडियन ऑटो इंडस्ट्री में मारुति 41.30% बिक्री कर रही है। पिछले साल इसी अवधि में 44.81% बाजार हिस्सेदारी के साथ मारुति 3.51% बिक्री कर पाई। मारुति बिक्री ग्राफ में ऑल्टो, बलेनो, वैगनआर, सेलेरियो, ब्रेज़ा पापुलर ब्रांड हैं।

हुंडई पिछले महीने कुल कारों की बिक्री में 14.97% हिस्सेदारी हासिल कर पाई। Hyundai Creta, i20, Grand i10 Nios और Aura Hyundai उसके लोकप्रिय ब्रांड हैं।

इन सभी को टाटा मोटर्स की चुनौती का सामना करना पड़ रहा है। भारत में कुल कार बिक्री में 14.36% ग्राहक आधार वाली Tata Motors ने बाजार में खलबली मचा रखी है।

टाटा की नेक्सॉन और पंच लगातार बिक रही है। Mahindra भी बाजार की बड़ी खिलाड़ी है। किआ की कार नवंबर 2022 में 7.49% प्रतिशत बिकी थी। टोयोटा, होंडा और रेनॉल्ट इस सूची में 6वें, 7वें और 8वें स्थान पर हैं।

स्कोडा कार निर्माता कंपनी का मार्केट शेयर 1.38% था। निसान, VW और जीप इस सूची में 11वें, 12वें और 13वें नम्बर पर हैं। Citroen की बाजार हिस्सेदारी पिछले साल 0.26% थी।

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